एकतरफ़ा मोहब्बत की प्यास

यह शायरी एक ऐसी मोहब्बत की कहानी कहती है, जहाँ चाहत तो है लेकिन इज़हार की इजाज़त नहीं। “Ab ham khud ko duba bethe h .ab bhi aash h” पंक्ति इस बात को साफ़ दर्शाती है कि इंसान भले ही हालातों में हार गया हो, लेकिन दिल के किसी कोने में उम्मीद अब भी ज़िंदा रहती है। यही उम्मीद एकतरफ़ा मोहब्बत की सबसे बड़ी ताक़त भी होती है और सबसे बड़ी कमज़ोरी भी।

“Samundar k pass h fir bhi piyase bethe h” इस शायरी की सबसे गहरी पंक्ति है। समुंदर यहाँ उस इंसान का प्रतीक है, जिसे चाहा जा रहा है, और प्यास उस अधूरी चाहत का रूप है, जो पास होकर भी पूरी नहीं हो पा रही। यह पंक्ति उन सभी लोगों की भावना को छूती है, जिन्होंने सब कुछ सामने होते हुए भी खुद को खाली महसूस किया है।

इस शायरी में ख़ामोशी सबसे बड़ा भाव है। “Ijajat nhi h unse bt karni ,Bo h kisi or ki” यह पंक्ति बताती है कि मोहब्बत सिर्फ़ दिल का मामला नहीं होती, उसमें हालात, रिश्ते और सीमाएँ भी होती हैं। जब सामने वाला किसी और का हो, तब चाहने वाला सिर्फ़ अपने जज़्बातों को ही क़ैद कर सकता है। यह वही पल होता है, जहाँ इंसान सबसे ज़्यादा अकेला महसूस करता है।

“Isliye dil ko tasalli de bethe h” एक बहुत सच्ची हक़ीक़त को बयान करती है। जब इंसान कुछ कर नहीं सकता, कुछ कह नहीं सकता, तब वह खुद को समझाने लगता है। यह तसल्ली अस्थायी होती है, लेकिन इसी के सहारे इंसान रोज़ खुद को संभालता है। यही एकतरफ़ा मोहब्बत का सच है — बिना शिकायत, बिना उम्मीद, सिर्फ़ ख़ामोशी।

यह शायरी उन लोगों के लिए है, जिन्होंने किसी को टूटकर चाहा लेकिन कभी अपना नहीं बना पाए। यह किसी कहानी को सजाकर पेश नहीं करती, बल्कि सीधी और कच्ची सच्चाई को सामने रखती है। इसमें न कोई शिकायत है, न कोई इल्ज़ाम, बस हालातों की स्वीकारोक्ति है।

आज के समय में जहाँ मोहब्बत को अक्सर पाने और जताने से जोड़ा जाता है, यह शायरी बताती है कि कुछ मोहब्बतें सिर्फ़ महसूस करने के लिए होती हैं। उन्हें शब्दों की ज़रूरत नहीं होती, न ही मंज़िल की। वे बस दिल में रह जाती हैं, उम्र भर के लिए।

जो पाठक एकतरफ़ा मोहब्बत, अधूरी चाहत और ख़ामोश दर्द से जुड़ी हिंदी शायरी पढ़ना पसंद करते हैं, उनके लिए यह रचना एक सच्चा एहसास है। यह शायरी पढ़ी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है — ठीक वैसे ही जैसे इसे लिखा गया है।

“”अब हम ख़ुद को डुबा बैठे हैं, अब भी आस है।

समुंदर के पास हैं, फिर भी प्यासे बैठे हैं।

इजाज़त नहीं है उनसे बात करनी, वो किसी और की हैं।

इसलिए दिल को तसल्ली दे बैठे हैं।””

 

” राहें बहुत थी पर उस गली से निकलना अच्छा लगता था।

पड़ता था उस शख़्स का घर , झांकना मुझे को पड़ता था 

मुर्सद उनका दीदार करना एक तरफ़ा मोहब्बत हो गई

ज़िंदगी बदल गई उस दिन, जब मोहब्बत निकले किसी ओर की बो।

हम तो धोखे में रहे ग़ालिब….

जब फूल निकले हमारी गली के ग़ालिब के बो।”

Jaypee shayari.in✍️

टिप्पणियां

“एकतरफ़ा मोहब्बत की प्यास” को एक उत्तर

  1. Shahaz अवतार
    Shahaz

    Wah wah kiya shayri likhte ho app

    Aisi hi shayri roj daal diya kro hum wait krte hain apki shayri ka ki apse bat toh nhi ho skti kam se kam apki shayri hi pdh lenge

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