मेरी ख़ामोशी यूँ बोलेगी,
दीवारों पर लिखी मेरी दोस्ती बोलेगी।
हर उस लम्हे में, जो तन्हाई में गुज़रा,
मेरे दर्द की कहानी बोलेगी।
मेरे हर ज़र्रे में होगा मेरा ख़त तेरे नाम,
कभी मन करे तुझे मिलने का, तो तू आ जाना शाम।
मेरे घर की इन ख़ामोश दीवारों को
मेरी अधूरी दास्तान सुना जाना।
कितनी वीरान है मेरी ज़िंदगी,
न रात कटती है, न दिन गुज़रता है।
हर लम्हा जब तुझे याद करता हूँ,
आँखों से आँसुओं का सैलाब उतरता है।
कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं,
ख़ामोशी से ज़िंदा रहते हैं।
जहाँ शिकवे कहे नहीं जाते,
वहीं दर्द दीवारों में बस जाते हैं।
यह शायरी उसी ख़ामोश प्यार की कहानी है,
जो सामने नहीं आया,
लेकिन हर साँस में महसूस हुआ।
Jaypee shayari.in✍️
प्रातिक्रिया दे