“”दर्द एक हो तो पी जाऊँ,
दुनिया की हर जिल्लत से भी लड़ जाऊँ।
कोई हमसफ़र पूछता है, कोई दवा-ख़ाना,
कोई ज़िंदगी की कीमत का भाव पूछ जाता है।
हम भी अपनी ज़िंदगी का दाम,
चंद कौड़ियों में बता कर जी लेते हैं।
मेरे हर दर्द के बाद एक आईना
काम आता है मेरे…..
उसके सामने खड़ा होकर
अपना हर दर्द बयां करता हूँ,
मेरी ज़िंदगी का इकलौता गवाह वही है—
जिसके सामने किस्से सुना कर रो लिया करता हूँ।””
Jaypee shayari.in✍️
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