कुछ अल्फ़ाज जो दिल से निकले ,
आज वहीं शायरी बन गए ।
दर्द भी अपना सा लगा ,
जब एहसास कागज़ पर उतर गए ।
खामोशी भी बोल उठी,
जब कलम ने सच लिख दिया।
कुछ अल्फ़ाज जो दिल से निकले ,
आज वहीं शायरी बन गए ।
दर्द भी अपना सा लगा ,
जब एहसास कागज़ पर उतर गए ।
खामोशी भी बोल उठी,
जब कलम ने सच लिख दिया।
द्वारा
टैगस:
प्रातिक्रिया दे