रास्ते बहुत थे, पर रात काली थीं।
हर उस अंधेरे के सन्नाटे में एक गूंज निराली थी।
तेरा जिस्म ओर रूह था किसी का,पर परछाईं काली थी।
तेरा तेरी दहलीज़ से, किसी अंजान शक्श के साथ निकलना।
मेरी मोहब्बत की एकलौती बो अधूरी कहानी थी।
Jaypee shayari.in✍️

रास्ते बहुत थे, पर रात काली थीं।
हर उस अंधेरे के सन्नाटे में एक गूंज निराली थी।
तेरा जिस्म ओर रूह था किसी का,पर परछाईं काली थी।
तेरा तेरी दहलीज़ से, किसी अंजान शक्श के साथ निकलना।
मेरी मोहब्बत की एकलौती बो अधूरी कहानी थी।
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