वो हैं किसी और के,
और मैं अब भी उन पर मर रहा हूँ।अपनों के बदल जाने का ग़म नहीं मुझे,
शिकायत बस इतनी है खुद से।
कि ज़ुल्म मैं खुद पर ही कर रहा हूँ,
वो हैं किसी और के,
और मैं उन पर मर रहा हूँ।

वो हैं किसी और के,
और मैं अब भी उन पर मर रहा हूँ।अपनों के बदल जाने का ग़म नहीं मुझे,
शिकायत बस इतनी है खुद से।
कि ज़ुल्म मैं खुद पर ही कर रहा हूँ,
वो हैं किसी और के,
और मैं उन पर मर रहा हूँ।
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