श्रेणी: दर्द भरी कविता / जीवन की सच्चाई

  • “बरसात, बूँदें और बेवफ़ाई — प्रेम का भीगा हुआ रूप”

    “बरसात, बूँदें और बेवफ़ाई — प्रेम का भीगा हुआ रूप”

    बरसात हो रही है, पानी की बूँदें झर-झर कर रो रही हैं। लगता है तन्हाई के बादल इनको भी घेर बैठे हैं।   तभी तो ज़मीं से मिलने के लिए ये बूँदें भी तरस रही हैं। कसूर इन हवाओं का है जो एक छोर से उस छोर ले जाती हैं बादल।   टक-टक देखती है…

  • ख़्वाब – बचपन की सच्ची मोहब्बत पर दिल छू लेने वाली कविता

    ख़्वाब…..   बचपन के   बिन बने मौसम के बदल वर्ष जायेंगे। देखना तुम एक दिन , हमारी मोहब्बत पाने के लिए तरस जाओगे। कागज की बनी नैया कभी दरिया पार नहीं होती। बचपन की हुई मोहब्बत हर किसी से बार बार नहीं होती। मेरे खुबाओ की रानी हो तुम,तुम दिया तो मैं बत्ती बन…

  • इस जनम का कर्ज़.

    इस जनम का कर्ज़.

    किसी ने किया खूब लिखा है सुना है इंसान कर्ज़दार होता है हर जनम का मेरा जनम कर्ज़दार है इस जनम का किया लिखने वाले ने हर जनम में मुझे कर्ज़दार चुना है मेरे सिर का साया बचपन में चला गया गरीबी भूख मेरी माँ और मैंने देखी है जब मैं कुछ नासमझ था तो…