श्रेणी: दर्द भरी शायरी

  • कसूर बेख़ुदी का था – मोहब्बत और ज़िंदगी की सच्ची शायरी

    कसूर बेख़ुदी का था – मोहब्बत और ज़िंदगी की सच्ची शायरी

    दर्द भरी मोहब्बत शायरी ज़िंदगी के उन जज़्बातों को बयान करती है, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता।   कसूर इसका नहीं, इसकी बेख़ुदी का था, ज़माने में इसे यूँ ही किसी ने नहीं पटक दिया। इसके पीछे कसूर इसकी ज़िंदगी का है। यूँ ही ख़ामोश नहीं हो जाते लोग ज़माने में, किसी को…