श्रेणी: दर्द शायरी / बेवफ़ाई शायरी
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एकतरफ़ा मोहब्बत की प्यास
यह शायरी एक ऐसी मोहब्बत की कहानी कहती है, जहाँ चाहत तो है लेकिन इज़हार की इजाज़त नहीं। “Ab ham khud ko duba bethe h .ab bhi aash h” पंक्ति इस बात को साफ़ दर्शाती है कि इंसान भले ही हालातों में हार गया हो, लेकिन दिल के किसी कोने में उम्मीद अब भी ज़िंदा…
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दर्द, मोहब्बत और कफ़न तक का सफ़र
दर्द को देखना है तो मेरी दहलीज़ पर आ जा। फिर से जीना है तो मोहब्बत से दूर चला जा। नहीं तो ग़म तेरे साथ होगा। वो होगी किसी और की, और तू मेरा हक़दार होगा। ना तुझे जीने दूँगा, ना मरने— तेरे हर लफ़्ज़ में उसका नाम होगा। जब थक जाएगा तू अपने ग़म…
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रिश्तों की वजह और जिस्म की भूख।
यूँ ही नहीं बदल जाते हर रिश्ते, कोई तो वजह होगी। ग़ालिब कसूर तेरा-मेरा नहीं, उन रिश्तों में कहीं न कहीं दग़ा की बात होगी। बदनाम ज़माना करता है मोहब्बत को, मोहब्बत नहीं, जिस्म-जिस्म को चाहता है, रूह को नहीं। जब रूह से मोहब्बत हो तो जिस्म की बात नहीं। आज तुम मेरी हो, कल…
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आँखों का नूर और बेख़बर इश्क़
आँखें, न जाने कहाँ है बेख़बर, तुझको ढूँढ रही है। यहाँ भी मेरी ये नज़र, छुप गए हैं ये बादल। देख तेरे आँखों के नूर को, कोई तो वजह होगी, ढूँढने की तुझको। Jaypeeshayari.in✍️
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मोहब्बत, ईमान और धोखा | सच्ची दर्द भरी शायरी
वो गली छोड़ दी मैंने, जहाँ तेरा दीदार हुआ करता था, मोहब्बत के आशिक़ हर रोज़ तेरी गलियों में घूमा करते थे। उनकी बातों में कहीं न कहीं मेरा ज़िक्र भी हुआ करता था, क्योंकि तुझसे मोहब्बत करने वाला आशिक़ मैं ही हुआ करता था। मोहब्बत कोई खेल नहीं थी मेरे लिए, ये मेरा ईमान…
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बेवफ़ाई के सबूत और झूठा प्यार | दर्द भरी शायरी
हमारे अल्फ़ाज़ तेरी उस बेवफ़ाई के सबूत होंगे, तू होगी यहाँ, तेरी आँखों में आँसू ज़रूर होंगे। हर लफ़्ज़ में तेरे निकले हुए उन तीरों का दर्द होगा, ये कायनात होगी, तेरे साथ तेरा हमदर्द होगा। पर इस कायनात में हम नहीं, सिर्फ़ हमारा दर्द होगा, क़लम होगी हमारी, पर तेरा झूठा प्यार उसमें दफ़न…
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हर गुनाह का गुनहगार।
चल ज़िंदगी, फिर तुझसे मुलाक़ात करते हैं, हम पर जो गुज़री उस पर भी बात करते हैं। गुनाह छोटा हो या बड़ा, उनकी नज़रों में हर गुनाह एक-सा होगा, मासूम वही ठहरेंगे, और गुनहगार बस तू ही होगा। ऐ आशिक़ के दीवाने, मोहब्बत सोच-समझकर किया कर, ज़ुल्म तूने किया हो या उसने, हर गुनाह का…
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“अधूरी-मोहब्बत…”
रास्ते बहुत थे, पर रात काली थीं। हर उस अंधेरे के सन्नाटे में एक गूंज निराली थी। तेरा जिस्म ओर रूह था किसी का,पर परछाईं काली थी। तेरा तेरी दहलीज़ से, किसी अंजान शक्श के साथ निकलना। मेरी मोहब्बत की एकलौती बो अधूरी कहानी थी। Jaypee shayari.in✍️