श्रेणी: शायरी / मोहब्बत शायरी

  • दर्द, मोहब्बत और कफ़न तक का सफ़र

    दर्द, मोहब्बत और कफ़न तक का सफ़र

    दर्द को देखना है तो मेरी दहलीज़ पर आ जा। फिर से जीना है तो मोहब्बत से दूर चला जा। नहीं तो ग़म तेरे साथ होगा। वो होगी किसी और की, और तू मेरा हक़दार होगा। ना तुझे जीने दूँगा, ना मरने— तेरे हर लफ़्ज़ में उसका नाम होगा। जब थक जाएगा तू अपने ग़म…

  • आजकल की मोहब्बत और मजबूरी पर दर्द भरी शायरी

    मोहब्बत में दूरियाँ हो जाती हैं, दोनों के हक़ की मंज़ूरी हो जाती है। ऐसे ही कोई छोड़ नहीं देता अपनी मोहब्बत, हर जुदाई के पीछे कोई न कोई मजबूरी होती है। Jaypee shayari .in✍️