श्रेणी: Kavita

  • वक़्त बदला, गाँव बदला – यादों से शहर बनने तक

    देखो, नज़रें झपकी ही थीं कि समय बदल गया। मेरा गाँव ही मानो शहर में बदल गया। जिसमें बचपना गुज़रा मेरा, वो कच्ची गलियाँ आज पक्की हो गई हैं। अब हर घर की दीवारें मिट्टी की नहीं रहीं, सब पत्थर की बन गई हैं। गाँव के एक छोर पर सूरज की किरण पड़ती थी, वहीं…

  • ज़िंदगी और समय पर हिंदी कविता।

    ज़िंदगी और समय पर हिंदी कविता।

    ज़िंदगी पर कविता। ज़िंदगी और समय पर भावनात्मक कविता। यह कविता ज़िंदगी के उन पहलुओं को दिखाती है जहाँ समय, हालात और अपनों का व्यवहार इंसान को उम्र से पहले समझदार बना देता है।   मंद–मंद चल रही है ज़िंदगी, ज़िंदगी को पता है। अभी तो बचपना गुज़रा था, बुढ़ापा आने को खड़ा है।ये समय…

  • इस जनम का कर्ज़.

    इस जनम का कर्ज़.

    किसी ने किया खूब लिखा है सुना है इंसान कर्ज़दार होता है हर जनम का मेरा जनम कर्ज़दार है इस जनम का किया लिखने वाले ने हर जनम में मुझे कर्ज़दार चुना है मेरे सिर का साया बचपन में चला गया गरीबी भूख मेरी माँ और मैंने देखी है जब मैं कुछ नासमझ था तो…

  • सुकून ….

    सुकून की तलाश में चला हूँ मैं, इस जहाँ की हर उलझन से अकेला लड़ा हूँ मैं। छोटी-सी उम्र, बोझ बड़े अरमानों का, ख़ामोशी ओढ़े, खुद ही खुद को पढ़ा हूँ मैं। @jaypeeshayari.in✍️

  • कहानी: उदयपुर के राजकुमार की गूढ़ कथा

    कहानी: उदयपुर के राजकुमार की गूढ़ कथा

    बहुत प्राचीन समय की बात है। उदयपुर नगर में चंद्रभान नाम का एक धर्मनिष्ठ, न्यायप्रिय और राजनीतिज्ञ राजा राज्य करता था। वह अपनी प्रजा का सच्चा हितैषी था और कभी किसी निर्दोष को दंड नहीं देता था। प्रजा भी उसे हृदय से प्रेम करती थी। राजा चंद्रभान की तीन रानियाँ थीं— पहली शाकुंतला, दूसरी मीनाक्षी…

  • ख़ामोश फ़रियाद

    किसी ने तेरे दर पर अपना प्यार माँगा। किसी ने तेरी मूरत में संसार माँगा। देखती रही तेरी तस्वीर आँखों की धारा, बहते अश्कों ने भी तुझसे इकरार माँगा। क्यों तेरे दर पर आकर लोग यूँ रो जाते हैं, बिन मतलब भी ये दिल तुझसे जुड़ जाते हैं। क्या तू ही उनका सच्चा प्यार बन…

  • संघर्ष shayari…

    तिनका तिनका जोडकर मैंने घर बनाया . पंछियों -सा छोटा सा घर था उसे मैने प्रेम से खूब सजाया । चुनौतियों को चुनते हुए,हर संघर्ष को अपनाया. पानी बनकर बहता रहा,हर पत्थर से टकराया। कभी झरनों में खुद को पाया,कभी नदियों में समाया. एक दिन सागर सा बनकर उठा,सारा आश्मान छू आया। तिनका तिनका जोडकर…

  • संघर्ष कविता 2…..

    मंजिल की तलाश में , अधूरा – सा रह गया हूं. लगता है संघर्ष कभी ख़त्म नहीं होगा। पूरा जीवन बीत गया ,अब भिड़ में कहीं- सा खो गया हूं मैं , चल,फिर मुलाक़ात होगी, संघर्ष की ही बात होगी. आज तू है तो किया ,कल हमारे संघर्ष की कहानी की बात होगी। कायार होते…

  • संघर्ष कविता..( shangharsh kavita ..)

    तिनका तिनका जोडकर मैंने एक घर बनाया. पंछियों-सा छोटा सा घर था,उसको मैंने प्रेम से सजाया। चुनौतियों को चुनते हुए,मैने हर संघर्ष को अपनाया. पानी बनकर बहता रहा ,हर पत्थर से टकराया। कभी झरनों में खुद को पाया,कभी नदियों में समाया. एक दिन सागर बनकर उठा ,उसकी लहरों से आश्मान छू आया । तिनका तिनका…

  • “Piyar nhi tabayat thi”

    तू नहीं तेरा जिस्म चाहिए उसको। बस खेल ने के लिए एक खिलौना चाहिए था उसको। उस खेल का हिस्सा तू हो गया। तेरा जिस्म बिका पर तेरी रुह का सोडा हो गया। बो लड़की नहीं थी ,तबायत बन गई उसी लड़की के इक्श का तू इक्का बन गया । …Jaypeeshayari.in…..