दर्द भरी मोहब्बत शायरी ज़िंदगी के उन जज़्बातों को बयान करती है, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता।
कसूर इसका नहीं, इसकी बेख़ुदी का था,
ज़माने में इसे यूँ ही किसी ने नहीं पटक दिया।
इसके पीछे कसूर इसकी ज़िंदगी का है।
यूँ ही ख़ामोश नहीं हो जाते लोग ज़माने में,
किसी को किसी की मोहब्बत ने मारा होता है,
तो किसी को अपनों के ग़म ने।
छोड़ जाते हैं अक्सर लोग एक लकीर,
जिसकी तक़दीर में लिखी हुई मोहब्बत नहीं होती।
अक्सर वही झोली भरते हैं औरों की,
जिनकी क़िस्मत में उनकी मनपसंद हीर नहीं होती।
जाने देते हैं उसे इस ज़माने के नाम पर,
क्योंकि ज़माने की झोली हमेशा फ़कीर की होती ।
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