जब मोहब्बत में कोई ओर आ जाए तन्हाई आ जाए पर कविता ।

दर्द, मोहब्बत और कफ़न तक का सफ़र

दर्द को देखना है तो मेरी दहलीज़ पर आ जा।

फिर से जीना है तो मोहब्बत से दूर चला जा।

नहीं तो ग़म तेरे साथ होगा।

वो होगी किसी और की, और तू मेरा हक़दार होगा।

ना तुझे जीने दूँगा, ना मरने—

तेरे हर लफ़्ज़ में उसका नाम होगा।

जब थक जाएगा तू अपने ग़म से,

तो कफ़न का एक टुकड़ा तेरे पास होगा।

.   Jaypee shayari.in✍️


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