चल ज़िंदगी, फिर तुझसे मुलाक़ात करते हैं,
हम पर जो गुज़री उस पर भी बात करते हैं।
गुनाह छोटा हो या बड़ा,
उनकी नज़रों में हर गुनाह एक-सा होगा,
मासूम वही ठहरेंगे,
और गुनहगार बस तू ही होगा।
ऐ आशिक़ के दीवाने,
मोहब्बत सोच-समझकर किया कर,
ज़ुल्म तूने किया हो या उसने,
हर गुनाह का गुनहगार तू ही होगा।
प्रातिक्रिया दे