ख़्वाब – बचपन की सच्ची मोहब्बत पर दिल छू लेने वाली कविता

ख़्वाब…..

 

बचपन के

 

बिन बने मौसम के बदल वर्ष जायेंगे।

देखना तुम एक दिन , हमारी मोहब्बत पाने के लिए तरस जाओगे।

कागज की बनी नैया कभी दरिया पार नहीं होती।

बचपन की हुई मोहब्बत हर किसी से बार बार नहीं होती।

मेरे खुबाओ की रानी हो तुम,तुम दिया तो मैं बत्ती बन कर आऊंगा।

इस जन्म में तो किया है हर जन्म में तेरा साथ निभाऊंगा

उन खूबाओं को बदल दूंगा में जिसमें तुम नहीं हो ।

जात पात का जिक्र नहीं चलता मेरे खुबाओ में।

तेरे हर रीति रिवाज निभाऊंगा बात तेरे सात फैरो की है ।

उनको में मरते दम तक , अग्नि को साक्षी मान कर निभाऊंगा।


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