वो गली छोड़ दी मैंने, जहाँ तेरा दीदार हुआ करता था,
मोहब्बत के आशिक़ हर रोज़ तेरी गलियों में घूमा करते थे।
उनकी बातों में कहीं न कहीं मेरा ज़िक्र भी हुआ करता था,
क्योंकि तुझसे मोहब्बत करने वाला आशिक़ मैं ही हुआ करता था।
मोहब्बत कोई खेल नहीं थी मेरे लिए, ये मेरा ईमान थी,
पर तूने मोहब्बत छोड़कर बदले में जिस्म को चुन लिया।
इस लिए तेरे जिस्म की भूख तेरी ,पहचान थी।।
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