जब मोहब्बत में कोई ओर आ जाए तन्हाई आ जाए पर कविता ।

“जिस इक्श में मैं शामिल न रहा”

मोहब्बत इस ज़माने की नहीं है तुझसे,कोई तो वजह होगी, खुदा को तुझसे फिर मिलाने की।अब नज़र से नज़र नहीं मिलेगी,तू अब किसी और गली का फूल है।इस गली में मेरे जैसे माली की बस धूल है,तेरी इस इश्क़ की जड़ों मेंअब मेरी मिट्टी भी शामिल नहीं होगी।

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