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खामोशी और तन्हाई)
मेरी ख़ामोशी यूँ बोलेगी, दीवारों पर लिखी मेरी दोस्ती बोलेगी। हर उस लम्हे में, जो तन्हाई में गुज़रा, मेरे दर्द की कहानी बोलेगी। मेरे हर ज़र्रे में होगा मेरा ख़त तेरे नाम, कभी मन करे तुझे मिलने का, तो तू आ जाना शाम। मेरे घर की इन ख़ामोश दीवारों को मेरी अधूरी दास्तान सुना जाना।…