टैग: जिस्म और रूह रूह की मोहब्बत जिस्म की भूख रिश्तों की सच्चाई बदलते रिश्ते दर्द भरी मोहब्बत सच्ची मोहब्बत हिंदी शायरी

  • रिश्तों की वजह और जिस्म की भूख।

    यूँ ही नहीं बदल जाते हर रिश्ते, कोई तो वजह होगी। ग़ालिब कसूर तेरा-मेरा नहीं, उन रिश्तों में कहीं न कहीं दग़ा की बात होगी। बदनाम ज़माना करता है मोहब्बत को, मोहब्बत नहीं, जिस्म-जिस्म को चाहता है, रूह को नहीं। जब रूह से मोहब्बत हो तो जिस्म की बात नहीं। आज तुम मेरी हो, कल…