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अपनों के बदल जाने का ग़म नहीं | दर्द भरी हिंदी शायरी
वो हैं किसी और के, और मैं अब भी उन पर मर रहा हूँ।अपनों के बदल जाने का ग़म नहीं मुझे, शिकायत बस इतनी है खुद से। कि ज़ुल्म मैं खुद पर ही कर रहा हूँ, वो हैं किसी और के, और मैं उन पर मर रहा हूँ।
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मोहब्बत, ईमान और धोखा | सच्ची दर्द भरी शायरी
वो गली छोड़ दी मैंने, जहाँ तेरा दीदार हुआ करता था, मोहब्बत के आशिक़ हर रोज़ तेरी गलियों में घूमा करते थे। उनकी बातों में कहीं न कहीं मेरा ज़िक्र भी हुआ करता था, क्योंकि तुझसे मोहब्बत करने वाला आशिक़ मैं ही हुआ करता था। मोहब्बत कोई खेल नहीं थी मेरे लिए, ये मेरा ईमान…