टैग: बरसात कविता प्रेम कविता विरह शायरी दर्द भरी कविता बारिश और मोहब्बत बेवफ़ाई शायरी हिंदी काव्य
-

“बरसात, बूँदें और बेवफ़ाई — प्रेम का भीगा हुआ रूप”
बरसात हो रही है, पानी की बूँदें झर-झर कर रो रही हैं। लगता है तन्हाई के बादल इनको भी घेर बैठे हैं। तभी तो ज़मीं से मिलने के लिए ये बूँदें भी तरस रही हैं। कसूर इन हवाओं का है जो एक छोर से उस छोर ले जाती हैं बादल। टक-टक देखती है…