ख़ामोश फ़रियाद

किसी ने तेरे दर पर अपना प्यार माँगा

किसी ने तेरी मूरत में संसार माँगा।

देखती रही तेरी तस्वीर आँखों की धारा,

बहते अश्कों ने भी तुझसे इकरार माँगा।

क्यों तेरे दर पर आकर लोग यूँ रो जाते हैं,

बिन मतलब भी ये दिल तुझसे जुड़ जाते हैं।

क्या तू ही उनका सच्चा प्यार बन जाता है,

या अपने पापों का बोझ तुझको सुनाते हैं

 


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