—अमर कौन है?शरीर मिट्टी है, मिट्टी में मिल जाएगा,
पर जो भीतर जागे, वो कभी नहीं जाएगा।
मृत्यु देह की है, चेतना की नहीं,
जो स्वयं को जान ले, उसे अंत का भय नहीं।
नाम मिट सकते हैं, रूप बदल जाते हैं,
पर सत्य के शब्द युगों तक गूंज जाते हैं।
अहंकार मरे तो मनुष्य अमर हो जाए,
मैं का बंधन टूटे, तो आत्मा स्वयं को पाए।
जो जान गया “मैं कौन हूँ” का उत्तर सच्चा,
वही मरते-मरते भी अमर कहलाया बच्चा।
अमर वही है जो सत्य में जी ले हर पल,
मृत्यु भी जिसे न छू पाए—वो है आत्मबल।—
। ।। ।। ।।। ( Jaypeeshayari.in…)

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