Mindblown: a blog about philosophy.

  • ख़ामोश फ़रियाद

    किसी ने तेरे दर पर अपना प्यार माँगा। किसी ने तेरी मूरत में संसार माँगा। देखती रही तेरी तस्वीर आँखों की धारा, बहते अश्कों ने भी तुझसे इकरार माँगा। क्यों तेरे दर पर आकर लोग यूँ रो जाते हैं, बिन मतलब भी ये दिल तुझसे जुड़ जाते हैं। क्या तू ही उनका सच्चा प्यार बन…

  • “जिस इक्श में मैं शामिल न रहा”

    “जिस इक्श में मैं शामिल न रहा”

    मोहब्बत इस ज़माने की नहीं है तुझसे,कोई तो वजह होगी, खुदा को तुझसे फिर मिलाने की।अब नज़र से नज़र नहीं मिलेगी,तू अब किसी और गली का फूल है।इस गली में मेरे जैसे माली की बस धूल है,तेरी इस इश्क़ की जड़ों मेंअब मेरी मिट्टी भी शामिल नहीं होगी। । Jaypeeshayari.in  

  • अपनो से हारा हुआ हुं।

    **“जाने क्यों अक्सर अपने ही, अपनों से खफ़ा हो जाते हैं,इसमें कहीं न कहीं किसी अपने की ही कोई ख़ता होती है।समय के गुज़र जाने पर यह बात समझ में आती है,कि छोटी-सी ज़िंदगी में इंसान को इंसान से ही ठोकर मिलती है।अक्सर जो अपने कहलाते हैं, वही अपनों को गिराना चाहते हैं,और इस छोटी-सी…

  • रूह और जिस्म।

    तू उसकी ओर मत देख,जो तुझ से दूर गया.उसको जिस्म की भूख थी ,तेरे जिस्म को छु गया।तुझको लगा मोहब्बत है,पर बो तेरी रूह से खेल गया.अब तू उसकी यादों का तमाशा बन गया है जिसकी रूह को तू अपना समझता था अब बो रूह किसी ओर की जिंदगी का हिस्सा बन गया है ।…

  • संघर्ष shayari…

    तिनका तिनका जोडकर मैंने घर बनाया . पंछियों -सा छोटा सा घर था उसे मैने प्रेम से खूब सजाया । चुनौतियों को चुनते हुए,हर संघर्ष को अपनाया. पानी बनकर बहता रहा,हर पत्थर से टकराया। कभी झरनों में खुद को पाया,कभी नदियों में समाया. एक दिन सागर सा बनकर उठा,सारा आश्मान छू आया। तिनका तिनका जोडकर…

  • संघर्ष कविता 2…..

    मंजिल की तलाश में , अधूरा – सा रह गया हूं. लगता है संघर्ष कभी ख़त्म नहीं होगा। पूरा जीवन बीत गया ,अब भिड़ में कहीं- सा खो गया हूं मैं , चल,फिर मुलाक़ात होगी, संघर्ष की ही बात होगी. आज तू है तो किया ,कल हमारे संघर्ष की कहानी की बात होगी। कायार होते…

  • संघर्ष कविता..( shangharsh kavita ..)

    तिनका तिनका जोडकर मैंने एक घर बनाया. पंछियों-सा छोटा सा घर था,उसको मैंने प्रेम से सजाया। चुनौतियों को चुनते हुए,मैने हर संघर्ष को अपनाया. पानी बनकर बहता रहा ,हर पत्थर से टकराया। कभी झरनों में खुद को पाया,कभी नदियों में समाया. एक दिन सागर बनकर उठा ,उसकी लहरों से आश्मान छू आया । तिनका तिनका…

  • “Piyar nhi tabayat thi”

    तू नहीं तेरा जिस्म चाहिए उसको। बस खेल ने के लिए एक खिलौना चाहिए था उसको। उस खेल का हिस्सा तू हो गया। तेरा जिस्म बिका पर तेरी रुह का सोडा हो गया। बो लड़की नहीं थी ,तबायत बन गई उसी लड़की के इक्श का तू इक्का बन गया । …Jaypeeshayari.in…..

  • Matlabi duniya…

    Matlabi duniya…

    छोटी उम्र h उसकी, मतलब के नाते है काम हो,तो सब मिलने आते है,नहीं तो यार. नाते रिश्ते सब पीछे छूट जाते है। समझ ना समझ की तो बात ही नहीं थीं। अपना समझ कर अब बुलाते है। हमारी पीठ पीछे सारे किस्से सुनाए जाते है। यहां मतलब कि रिश्तेदारी हैं,न किसी में कोई समझदारी…

  • दिल को चुने वाली शायरी…..

    कुछ अल्फ़ाज जो दिल से निकले , आज वहीं शायरी बन गए । दर्द भी अपना सा लगा , जब एहसास कागज़ पर उतर गए । खामोशी भी बोल उठी, जब कलम ने सच लिख दिया।

क्या आपके पास कोई पुस्तक अनुशंसाएँ हैं?