दिलों में दिल को बसाने चला है परिंदा।
न असमां का, न उड़ान का पता है।
आसमान खुला है, देख जहान को।
वो उलझनों में पड़ा है,
है मंज़िल तेरी ऊपर ,
और ये जहाँ तेरे नीचे पड़ा है।

दिलों में दिल को बसाने चला है परिंदा।
न असमां का, न उड़ान का पता है।
आसमान खुला है, देख जहान को।
वो उलझनों में पड़ा है,
है मंज़िल तेरी ऊपर ,
और ये जहाँ तेरे नीचे पड़ा है।
द्वारा
प्रातिक्रिया दे