यह कविता प्रेम की उस गहराई को दर्शाती है जहाँ भगवान भी भक्त के सामने झुक जाते हैं। राधा, मीरा और शबरी के प्रेम से सीखिए सच्चे प्रेम का अर्थ।
प्रेम बस जीवन की एक शुरुआत है, इसका अंत नहीं—यह अनंत की बात है।
राधा-रुक्मिणी प्रेम की डोर सिखाती हैं,
देख मीरा प्रेम में विष का प्याला भी पी जाती है।
प्रेम बस जीवन की शुरुआत है…
प्रेम में त्याग करना पड़ता है,
अपनों को भी छोड़ जाना पड़ता है।
एक थी शबरी, जिसके प्रेम में
भगवान को झूठा फल भी खाना पड़ता है।
यह प्रेम ही है जो भगवान को
भक्त के द्वार तक आना पड़ता है।
यह प्रेम अंत नहीं—अनंत है,
भगवान को पाने का मूल मंत्र है।
देखो सुदामा की दुर्दशा,
कृष्ण ने अश्रुओं से उनके चरण धोए थे।
यह प्रेम ही तो है, माधव—
जिस प्रेम में भगवान भी रोए थे।
प्रेम जीवन की शुरुआत है,
यह अंत नहीं—अनंत की बात है।
देखना, जब प्रचंड युद्ध होगा,
रण में रक्त की धारा बहेगी।
नर-नारी में प्रेम के संग न होंगे,
वासना की छाया हर ओर रहेगी।
छिप जाएगी जल की धारा भी खंडों में,
तप्त रक्त से प्यास बुझाएगी भू।
तड़पेगा मानव अपने ही कर्मों से,
जब प्रेम छोड़ देगा जग को यूँ।
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