मुसाफिर

मुसाफिर

मुसाफ़िर हूँ मैं, मंज़िलो का

थक कर बैठ जाना मेरी फ़ितरत नहीं

गुरूर है तुझको अपने हुस्न पर

ज़रा इस उम्र को तो ढल जाने दे


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