मुसाफ़िर हूँ मैं, मंज़िलो का
थक कर बैठ जाना मेरी फ़ितरत नहीं
गुरूर है तुझको अपने हुस्न पर
ज़रा इस उम्र को तो ढल जाने दे

मुसाफ़िर हूँ मैं, मंज़िलो का
थक कर बैठ जाना मेरी फ़ितरत नहीं
गुरूर है तुझको अपने हुस्न पर
ज़रा इस उम्र को तो ढल जाने दे
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