तिनका तिनका जोडकर मैंने घर बनाया .
पंछियों -सा छोटा सा घर था उसे मैने प्रेम से खूब सजाया ।
चुनौतियों को चुनते हुए,हर संघर्ष को अपनाया.
पानी बनकर बहता रहा,हर पत्थर से टकराया।
कभी झरनों में खुद को पाया,कभी नदियों में समाया.
एक दिन सागर सा बनकर उठा,सारा आश्मान छू आया।
तिनका तिनका जोडकर मैंने
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