संघर्ष shayari…

तिनका तिनका जोडकर मैंने घर बनाया .

पंछियों -सा छोटा सा घर था उसे मैने प्रेम से खूब सजाया ।

चुनौतियों को चुनते हुए,हर संघर्ष को अपनाया.

पानी बनकर बहता रहा,हर पत्थर से टकराया।

कभी झरनों में खुद को पाया,कभी नदियों में समाया.

एक दिन सागर सा बनकर उठा,सारा आश्मान छू आया।

तिनका तिनका जोडकर मैंने

 

 

 

 


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टिप्पणियां

“संघर्ष shayari…” के लिए प्रतिक्रिया 2

  1. Mahi अवतार
    Mahi

    Bhut achi kavita likhte hain ap
    Aise hi roj shayri kavita lihka kre

jaypal13012000@gmail.com को प्रतिक्रिया दें जवाब रद्द करें

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